Bottom Article Ad

सरकार की गाइड लाइन को देखते हुये ताज़िये दफ़न नही हुये

 सरकार की गाइड लाइन को देखते हुये ताज़िये दफ़न नही हुये------

सौरिख कन्नौज मोह


र्रम की दस तारीख को ताज़िये कर्बला में सुपुर्दे खाक किये जाते हैं मगर कोरोना महामारी को देखते हुये शासन ने गाइड लाइन जारी कर कहा कि ताज़िये इस साल मोहर्रम में नही दफ़न होंगे ।अली अब्बास मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि कर्बला की धटना संसार की उन महानतम धटनाओं में से एक है जिसकी याद शताब्दियाँ बीत जाने के बाद भी मनाई जाती है और उसके प्रभाव में आज तक कोई कमी नहीं आई है जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है  वैसे वैसे कर्बला की धटना और अधिक प्रकाशमान होती जा रही है कर्बला की क्रांति और इमाम हुसैन का आंदोलन एक अभूतपूर्व  और बेजोड़ क्रांति है जिसने किसी भी अन्य क्रांति की तुलना मे अत्याचारी यज़ीद को अपमानित कर दिया इमाम हुसैन का आंदोलन सत्य के लिये असत्य के विरुद्ध एक आंदोलन था ,कर्बला और यह मोहर्रम हमे हमेशा यह याद दिलायेगा की ज़ुल्म करने बाला चाहे जितना बड़ा हो और चाहे जितना खूँखार हो और हम चाहें जितने कम तादाद में हों यदि ईमानदारी से उसके खिलाफ हैं तो उसका नेस्त नाबूद होना तय है इसी क्रांति से प्रभावित होकर गांधी जी ने कहा कि मैंने इमाम हुसैन से ही सीखा है कि मज़लूमियत में किस तरह जीत हासिल की जा सकती है  इस्लाम की बढ़ोत्तरी तलवार पर निर्भर नहीं करती वल्कि हुसैन के बलिदान का एक नतीजा है ।इसी तरह डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी ने भी इस क्रांति से प्रभावित होकर कहा कि इमाम हुसैन की कुर्बानी किसी एक मुल्क या कौम तक सीमित नहीं है बल्कि यह लोगों में भाई चारे  का एक असीमित राज्य है,इसी लिये आज पूरे विश्व मे इमाम हुसैन को मानने बाले मिलेंगे आज ही के दिन कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन का पूरा कुनबा शहीद हुआ था ।इमाम  हुसैन और उनके साथियों की शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिये मिसाल बन गई उनकी शहादत हमारी युवा पीढ़ी को ज़ुल्म और नाइंसाफी के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने तथा सच्चाई की राह पर चलने की प्रेरणा देती है ,मोहर्रम का यह महीना इंसानियत और मोहब्बत का पैग़ाम देता है इस मौक़े पर  हमें त्याग और बलिदान की भाबना के साथ समाज को मज़बूती देने तथा देश और प्रदेश के लिये किसी भी तरह की कुर्बानी देने के  लिये तैयार रहने का संकल्प लेना चाहिये इस मौके पर पुलिस प्रशासन की चाक चौबंद व्यवस्था रही ।



रिपोर्ट बिलाल अली

Post a Comment

0 Comments